Hindi Quote in Poem by Rima

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बिना दाँतों वाला प्यार

मेरे दादाजी…
आज आप इस दुनिया में नहीं हो,
पर मेरी हर थकी हुई साँस
आज भी आपको ढूँढती है।
आपके मुँह में एक भी दाँत नहीं था,
फिर भी चाय आपको बहुत पसंद थी—
गरम प्याली हाथों में लेकर
आप ज़िंदगी को
धीरे-धीरे जीते थे।
मैं जब भी आपके पास जाती,
आप बिना कुछ कहे
मेरे गाल को प्यार से काट लेते थे।
वो दर्द नहीं होता था,
वो प्यार होता था—
बिल्कुल वैसा
जैसे पाँच-छह महीने का बच्चा
अपनी माँ से लिपटकर
अपना सारा प्यार जता देता है।
मैं आपकी सबसे प्यारी थी,
और आप मेरे सबसे अपने।
आपका प्यार शब्दों में नहीं था,
वो चुपचाप
मेरी पूरी ज़िंदगी सँभाल लेता था।
जब आप प्यार से
मेरा नाम लेकर पुकारते थे,
वो आवाज़
आज भी कानों में गूँज जाती है।
लगता है जैसे अभी कहेंगे—
“आ जा बेटा…”
जब आप
अपने हाथों से मुझे खिलाते थे,
तो लगता था
जैसे ज़िंदगी
मुझे दोनों हाथों से थाम रही हो।
आपकी कहानियाँ,
आपका चुपचाप बैठने का तरीक़ा,
वो नज़र
जो बिना बोले सब कह जाती थी—
सब कुछ याद आता है दादाजी,
एक-एक पल।
फिर वो वक़्त आया
जब आप धीरे-धीरे
सबको भूलने लगे।
दुनिया आपसे फिसलती चली गई,
पर आपने मुझे नहीं भूला।
और मैं खुद को
बेहद ख़ुशनसीब मानती हूँ
कि मैं आपकी सेवा कर पाई,
आपको अपने बच्चे की तरह
सँभाल पाई।
वो दिन…
जब मैं आपकी बेटी भी थी,
माँ भी,
और आपकी पूरी दुनिया भी।
आज आप नहीं हो,
और आपके साथ
मेरा मायका भी नहीं रहा।
घर वही है,
पर वो सुकून,
वो प्यार,
वो छाया—
सब आपके साथ चला गया।
लोग कहते हैं
वक़्त सब भुला देता है,
पर कोई ये नहीं कहता
कि कुछ प्यार
याद बनकर नहीं,
दुआ बनकर
ज़िंदगी भर साथ रहते हैं।
आज भी जब चाय की ख़ुशबू आती है,
तो आँखें भर आती हैं—
शायद आप कहीं दूर नहीं,
आज भी
बिना दाँतों के
अपनी प्यारी-सी बच्ची को
प्यार जता रहे हों।
दादाजी…
आपका वो
बिना दाँतों वाला प्यार
आज भी
मेरी सबसे बड़ी ताक़त है।

Hindi Poem by Rima : 112015043
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