मैं छोड़ दूँ शिकायतेँ सभी तेरे लिए,
क्या तुम फिर भी झूठी क़सम खा पाओगी क्या?
मैं तेरे वास्ते ले लूँ एक मकान नया,
क्या तुम उन्हें अपना घर बना पाओगी क्या?
मैं वक़्त को रोक भी दूँ दो पल के लिए भी,
क्या तुम वक्त पे आ पाओगी क्या?
मैं कर भी लूँ इश्क़ तुझसे अभी,
क्या तुम फिर से बेवफ़ा बन पाओगी क्या?