चार दीवारी की कहानी
घर की चार दीवारी में,
एक कहानी है मेरी अपनी
रोज एक नई जंग हूं मैं एक गृहणी हूं
चूल्हे से लेकर चाबी तक,हर दिन एक नई कहानी
पानी भरने से लेकर पोंछा लगाने तक
हर काम में हैं मेरी कहानी,हर पल में हैं मेरी जवानी
पर रात के अंधेरे बत्ती बुझाती और खुद को ढूंढती हूं
और फिर एक पल ऐसा आता, खुद को ही भूल जाती
पर अगली सुबह फिर वही गृहस्थी में लग जाती मैं
इसलिए गृहणी कहलाती मैं
तो कहो ये कहानी किसकी