प्रेम Vs विवाह ; राजनीति Vs चुनावी राजनीति
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सभी प्रेम कहानियों के साहित्यों में एक गलत बात को बार बार दोहराया गया है कि -- जमाना प्यार का दुश्मन है !!
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यह बात ठीक नहीं है कि - ज़माना प्रेम का दुश्मन है। जमाने (जिसमें परिवार, समाज आदि शामिल है) को किसी भी व्यक्ति के प्रेम से कोई सख्त ऐतराज नहीं रहा है। जमाने को असली ऐतराज विवाह से होता है।
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और जब जमाना किसी के प्रेम पर ऐतराज कर भी रहा होता है तो उसका यह ऐतराज इस वजह से होता है कि कहीं प्रेमी युगल प्रेम करते करते विवाह न कर बैठे !!
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सलीम और मुगले आजम में इसीलिए ठन गयी थी कि सलीम अनारकली से निकाह करने पर अड़ गया था। यदि सलीम सिर्फ प्रेम तक सीमित रहता तो अकबर को कोई दिक्कत न थी। चाहे सलीम रोज नई अनारकली से प्रेम करें।
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और सभी लैला-मजनूओं की दास्तानों का सार यही है। जब तक बात प्रेम तक सीमित है, तब तक जमाना अनदेखी करता है। पर जैसे ही जमाने को विवाह का अंदेशा होता, जमाना बीच में कूद जाता है।
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यदि ज़माने को यह मुतमइन कर दिया जाए कि अमुक व्यक्ति सिर्फ प्रेम ही करेगा, और अपने प्रेमी से विवाह नहीं करेगा तो जमाना उसके प्रेम में बाधा नहीं बनता। उसे वह प्रेम करने की छूट दे देता है।
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क्योंकि जमाना आपको अपनी सम्पत्ति के रूप में देखता है, और प्रेम से जमाने कोई साम्पत्तिक हानि नहीं होती। ज़माना चाहता है कि आप प्रेम किसी से भी करो और कितनो से भी करो, और करते रहो, किन्तु विवाह सिर्फ वहां करो जहाँ जमाना चाहता है। क्योंकि यदि आप जमाने के खिलाफ जाकर विवाह कर लेते है तो जमाने को लगता है कि उसने नियंत्रण खो दिया है।
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यही शर्त "राजनीति एवं चुनावी राजनीति" पर लागू होती है।
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राजनीति में रुचि लेना, राजनैतिक विमर्श करना, जुलुस, प्रदर्शन, आन्दोलनो में हिस्सा लेना, सोशल मीडिया पर सरकार एवं राजनैतिक पार्टियों को कोसना आदि को जमाना (पेड मीडिया के प्रायोजक) निरापद प्रेम के रूप में देखता है। और जमाने को आपकी इस प्रेमल राजनैतिक रुचि से कोई ऐतराज नहीं।
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जमाना सिर्फ इतना चाहता है कि -- जब चुनाव आये तो आप उनके द्वारा खड़ी की गयी पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कोंग्रेस, सपा, आपा, बसपा, अकाली आदि) को वोट देकर आ जाओ। बस !!
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और वोट देने के बाद अगले 5 साल तक आप फिर से अपने अपने राजनैतिक प्रेम में खुद को व्यस्त कर सकते है। और ज़माना आपको कभी डिस्टर्ब करने नहीं आएगा।
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जमाना (पेड मीडिया के प्रायोजक) सिर्फ इतना चाहता है कि आप जमाने द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों के वोट काटने के लिए कोई नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम न करें।
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यदि आपको नया राजनैतिक विकल्प चाहिए तो जमाना आपको नया राजनैतिक विकल्प (नवीनतम उदाहरण "आपा") बनाकर दे देगा। किन्तु कार्यकर्ता खुद से कोई राजनैतिक विकल्प खड़ा करने पर काम करे तो जमाने को ऐतराज है।
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क्योंकि यदि मतदाताओं को पेड मीडिया पार्टियों के एजेंडे के खिलाफ काम करने वाला राजनैतिक विकल्प मिल जाता है तो जमाने द्वारा खड़ी पेड मीडिया पार्टियों को वोटो की हानि होगी। और वोट ही राजनैतिक जगत की वास्तविक सम्पत्ति है।
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इस वजह से पेड मीडिया युवाओं को "चुनावी राजनीती" में आने से हतोत्साहित करता है।
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राजनीती में रुचि लेने वाले ज्यादा से ज्यादा युवा यदि "चुनावी राजनीति" में आने लगेंगे तो चुनाव लड़ने वाले लोगो की संख्या बढ़ जाएगी। तब राजनीति से चुनावी राजनीति में शिफ्ट हुए ये कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम करने लगेंगे।
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और युवाओं को चुनावी राजनीती में आने रोकने के लिए उन्होंने कितने कानूनी, सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक लेंड माइन्स बिछा कर रखे है, इसे मैं लिखने जाऊँगा तो 1000 पृष्ठों में भी इसे समेटा नहीं जा सकता।
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सार यह है कि -- कार्यकर्ताओ को "राजनीती एवं चुनावी राजनीति" के बीच के फर्क को समझना चाहिए। वे आपको राजनीति में रुचि लेने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करेंगे किन्तु चुनावी राजनीति में रुचि लेने से हतोत्साहित !!
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और इस बात को अच्छे से नोट कर लें कि, जब भी कोई देश, समाज, राजनीति आदि की बात करने वाला कोई व्यक्ति या समूह इस मंशा से आपके पास आएगा कि आप राजनीती में रुचि ले किन्तु "चुनावी राजनीति" से दूरी बनाकर रखे तो वह हमेशा "जागरूक करने" की टर्म का इस्तेमाल करेगा !!
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दरअसल, जब कोई व्यक्ति यह कहता है कि - मैं लोगो को जागरूक कर रहा हूँ तो उसका उद्देश्य राजनीती में रुचि रखने वाले कार्यकर्ताओ को चुनावी राजनीति में आने से रोकना होता है।
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और राजनीती में रुचि रखने वाले लोगो को चुनावी राजनीती में आने से रोकने की प्रक्रिया को कुछ भी कह कर नहीं पुकारा जा सकता। इसीलिए इसे वह "जागरूक करने की प्रक्रिया" कह कर पुकारता है।
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जिस प्रेम को विवाह से इनकार है वह क्या है ?
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मुहब्बत जो डरती है -- अय्याशी है, गुनाह है : सलीम उवाच, मुगले आजम
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सलीम अनारकली से मुहब्बत को मुगले आजम से छिपाने से इनकार कर देता है। क्योंकि सलीम अनारकली से शादी करना चाहता था। और इसीलिए वह जानता था कि वह कोई गुनाह नहीं कर रहा। विवाह गुनाह नहीं है। किन्तु वे सभी अपने प्रेम को गुनाह की तरह इसीलिए छिपाते है क्योंकि विवाह को लेकर उनमें संशय होता है।
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