**सायं का स्वर**
शाम ढली, आँखों में छाया अँधेरा,
हृदय का दीप जला, बना उजियारा।
तारे बोले, “डर मत, है तू अकेला ना,”
चाँद ने थामा हाथ, दिया सहारा।
बादल बरसे, आँसू बनकर धरती पर,
हर बूँद में छुपा एक सपनों का संगीत।
वक्त की धार बहाती दुखों की रातें,
फिर भी जीवन गाता—अमर यह प्रीत।
उठ खड़ा हो, तू टूटे ख्वाबों से आगे,
हर घाव तेरा बनेगा उजाले का दीप।
अंधकार भी डरता है तेरे जज़्बे से,
तू जहाँ चले, वहाँ खिले फूलों की चित।
**“अंधेरा चाहे जितना घना हो,
एक दीया उसे मिटा देता है।”**