🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
{{अधूरी सी वो मुलाकात}}
अब डर सा लगता है सोने से, कि
फिर वही मंज़र आएगा,
तू फिर थामेगी हाथ मेरा, और दिल
फिर से बहल जाएगा,
सपनों की उस दहलीज़ पर” तू
हँसकर गले लगाती है,
फिर सुबह की पहली धूप मुझे तेरी
यादों से जलाती है,
यह कैसी मज़बूरी है.? की नींद में तू
मेरी है और हकीकत में कोसों दूरी है,
मैं अक्सर खुद से कहता हूँ, कि अब
तुझे याद नहीं करना,
इन सूनी-सूनी रातों में, तेरी फरियाद
नहीं करना,
मगर ये कम्बख्त आँखें, तेरी झलक
को तरसती हैं,
ये बादल बनकर यादों के, मुझ पर
ही बरसती हैं,
तू खुशबू है तो महकती रह, तू तारा
है तो चमकती रह,
पर मेरे इन सूखे जज़्बातों में यूँ बार
बार मत आया कर,
थक चुका हूँ मैं ये खेल- खेलकर
मिलने और बिछड़ जाने का,
अब हिम्मत नहीं बची मुझमें, इस
टूटे दिल को सजाने का,
या तो लौट आ हकीकत बनकर, या
फिर सपनों से भी नाता तोड़ दे,
मैं जैसा भी हूँ जिस हाल में हूँ, मुझे
मेरे हाल पर छोड़ दे…🥀🖤🔥
╭─❀💔༻
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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