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आईने के उस पार की दुनिया में झांकना,
सारी रात जागकर तुमसे बात करना
मुझे अच्छा लगता है...

ये शांत रातें,
शीतल बयार में घुलती
बस तुम्हारी ही बातें...

पर इस ठोस दीवार में
एक अदृश्य खिड़की का होना
कभी-कभी कितना बचकाना लगता है, न?
- softrebel

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उनकर नाम के रौशनी हमार आँखिन में चमक लावेला,
होठन के मुस्कान हमार हियरा के झुमावेला।

गावेला मन, जब-तब पुरवइया से केहू बोलावेला,
निरखेला मन मोर उनकर मुखड़ा,
कोइलर स्नेह गीत सुनावेला।

धड़केला छतिया, जब-तब रह-रह आग सुलगावेला,
हरियर-पीयर सब रंग फिका पड़ जाला—
लाल गमछिया, अइंठल मूंछ,
चाँद नियन चेहरा उनकर,
कागज नियन देह गोर,
हमार जियरा सगरी डोलावेला।

मोहे लागे तन मोर, शीतल छाँव पिया के,
बाकिर उनकर प्रीतिया हाथ ना आवेला।

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हम भी मरते हैं कई मर्तबा,
कई दफ़ा जीने का प्रयास करते हैं।
तुम्हें भूलकर जिएँ भी तो जीवन कैसा,
तुम्हें चाहकर मरें तो मृत्यु भी हमें छूती नहीं।
- softrebel

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चाँद उतरे अंगना में तोहार,
दिन जब बीते अँजोरिया रात हो।
सितारन के बीच-बीच,
अंतर्दर्पण में तोहसे ही मुलाकात हो।
न होखे शिकायत तोहरा जिनगी से,
आसमा के सातों रंग तोहार सौगात हो।

खिल उठे फूलन संग डाली भी,
जब दुअरा पे साजत तोहार बारात हो।
गली-गलईचा, बाग-बगइचा संग,
खेतन के आरी-ताड़ी भी झूमे,
जब-जब तोहर बात हो।

बढ़े उमिर संग खुशियाँ,
हीया से हुलसत—
राजा के माथा पे,
ईश्वर के हाथ हो
@softrebel

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प्रेम या छलावा।।

तुमसे प्रेम करना,
मेरे जीवन में आई तमाम नकारात्मकताओं के बाद भी
बची हुई ईश्वर की आरती-सी शुद्धता है
जिसकी तपिश न सही राख भी मेरे लिए घर ले जाना सोना है।
हृदय के किसी कोने में
मेरा अस्तित्व बनकर बस गया है तुम मुझमें।
ये ठीक वैसा ही है—
जैसे जीवन की भागदौड़ से थका व्यक्ति
अचानक अपने भीतर का जज़्बा फिर से पा ले।
ये वैसा ही है—
जब कोई तेज़ हवा सब कुछ उजाड़ कर चली जाए,
फिर भी मन में
पुनः बसाने, संवारने की चाह छोड़ जाए।
ये वैसा ही है
जहाँ पीड़ा, वैराग्य, विरह, वेदना
जैसे सब शब्द हार मान लेते हैं,
क्योंकि मेरे हृदय में
तुम्हारे नाम का प्रेम
हर बार जीत जाता है।
उस क्षण से
जब शायद पहली बार तुम्हारा ख्याल सहेजा होगा मैंने अपने किसी बाल्यकाल में,
या उस पल से
जब खिलाया होगा पत्तों का पहला निवाला तुम्हे खेल खेल में।
या उस समय से—
जब मिलन का कोई अनकहा संयोग रचा होगा हमने।
हाँ, उस पल से भी—
जब तुम्हारी कमियाँ, खामियाँ देखीं होगी मैंने,
और फिर भी उन्हें
दुनिया से छुपाकर
अपने भीतर ही सहेज लिया होगा।
और एक बार फिर,
पूरे सहृदय से तुम्हें अपनाया मैंने।
मैं हर बार
इसी तरह अपनाऊँगी तुम्हें—
सदैव अपनाती रहूँगी,
तुममें छुपे “हम” को।
क्योंकि तुम्हें अपनाना
कोई बदलाव नहीं—
ये मेरा चुनाव है,
मेरे भीतर छुपे “मैं” का चुनाव।
मै हर बार हार जाती हूं,
तुम्हारी इस निष्ठुरता से
तुम मेरे भीतर सदैव जीत जाते हो
हमारे भीतर छुपी कोमलता से।
ये कहना यक़ीनन अतिश्योक्ति होगी
की मुझे तुम से प्रेम है शिव
ये मानवीय उपकरणों से वशीभूत नहीं होता
जरूर कुछ दैवीय है शिव।
इसलिए मुझे तुमसे प्रेम नहीं है
कदापि नहीं
यह तो केवल छलावा है
मेरा,मुझसे किया गया सबसे बड़ा छल।
Softrebel
#matrubharti
#hindi
#prem
#love

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शीर्षक: दिल दरिया में..।

किसी के आलिंगन की छाँव में
सोना कितना सुखदायी होता है, न
न खौफ बाहरी आक्रांताओं का,
न ही नींद टूट जाने की कोई बेचैन-सी परेशानी।

कटती हैं रातें
बिना मच्छर, बिना शोर के,
और हो जाती है सारी रात रूमानी।

चिंताओं की जब सज जाती हैं चिताएँ,
संकोच नहीं रहता
कि कोई हमसे कर रहा है कोई बेईमानी।

बस
वो उसकी धड़कनें,
वो गर्म स्पर्श,
और ढेर सारा सुकून।

जैसे दिल दरिया में
और दरिया में पानी।
softrebel
#matrubharti
#hindi
#love

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बेटियां

होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।


माथे पे आँचल, हाथों में मेहंदी रची,
हल्दी के रंग में आज रंगी है वो गुड़िया।
लोरियों में पली, सपनों में ढली,
आज किसी और के घर की है वो धूपिया।

होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।

माँ की दुआ बन हर साँस में बहती है,
पापा की उम्मीद पलकों में चमकती है।
भाई-बहन, सखियों की हँसी साथ लिए,
हर रिश्ते में वो अपनी खुशबू बिखेरती है।

होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।

वो जा तो रही है, पर दूर नहीं हो रही ,
दो घरों की रौशनी बन दो आँगनों में चमक रही है।
एक घर की धड़कन, दूजे की सुबह,
हर दिल के आसमान में अपनी जगह लालिमा सी बिखेर रही है।
होगा ये घर कल उदास,
पर आज इस घर के हर कोने में अंजोरिया सी पसर रही है।

होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ,
आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया।
नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां,
अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है,
बस ऐसी होती है बिटिया
कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ।
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#matrubharti
#hindi
#betiyan

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दो दोस्तों में प्रेम पनप सकता है
किन्तु दो दोस्तों के बीच उत्पन्न प्रेम दोस्ती को भी दूषित कर देता है।
- softrebel

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___नए युग की स्त्रियाँ___

मस्तिष्क में द्वंद्व, हृदय में तूफ़ान लिए बैठे हैं,
हाँ—हाल तुमने पूछा तो
होठों पे मुस्कान लिए बैठे हैं।

स्त्री हैं जाति के,
काँधे पे किसी और का मकान लिए बैठे हैं,
हर क़दम पर देखो—
हम तुम्हारा अहसान लिए बैठे हैं।

गोरे हैं, काले हैं—ये भेद बाद की बात है,
हाँ, हम जब से जन्मे हैं
तुम्हारी जान लिए बैठे हैं।

बोझ कहो या रखो जूते की नोक पर,
स्त्री हैं जाति के—
तुम्हारे घर का सारा सम्मान लिए बैठे हैं।

सह कर ढेरों अपमान,
तुम्हारे सीने का गुमान लिए बैठे हैं।

नए युग की स्त्रियाँ हैं हम,
विद्रोह हमारी प्रवृत्ति है—
विश्वास नहीं होता तो आज़मा कर देख लो,
पार्वती के अंग में
काली की ज़ुबान लिए बैठे हैं।
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#poem
#striya

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___निशाग्नि___

मन के पीर, जिया के रीढ़ बन,
स्मृतियाँ सारी उभर रही हैं हृदय-पटल पर।

आँखों के अश्रु सब सूख,
कर्पूर की बाती जस
जलन रहे हैं हर दस्तक पर।

आज इन नेत्रों में निद्रा नहीं,
निशाग्नि नाच रही है मेरे मस्तक पर,
अंतर्मन की चेतना भी
हिल उठी है अब तो अंतस पर।

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