ऐ नए साल वादा है, अब ख़ुद से ही बेइंतहा मोहब्बत करूँगी,
अपने शिकस्त वजूद को ज़र्रा-ज़र्रा मैं फिर से समेट लूँगी।
लोग दो पल की शनासाई में उम्र भर की तन्हाई दे जाते हैं,
ख़ुद को ख़ुद का रफ़ीक़ बनाऊँगी, न किसी और को तवज्जो दूँगी।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️