Adolescent Age
अब सारी बातें मां से कह नहीं पाते
काम के लिए पैसे भी अब पिता से ले नहीं पाते
कहते कहते ही चुप हो जाते है
न जाने हम किस मौन की धारा में खो जाते है
अब कुछ न कहना इतना कुछ कह जाता है
की अब चिड़चिड़ाहट भी दुख का प्रयाय बन रह जाता है
अब शांति थोड़ी गंभीर सी लगती है
अब गुस्से से चिल्लाना घमंड नहीं पीड़ा को व्यक्त करता है
अब क्रोध की अग्नि गालियां नहीं
आंसू बन निकलती है
कुछ यही बातें हमारे पिछली पीढ़ी को भी बड़ी खलती है
कहते है कि नवाब हो गए है सब
कौन बताए उन्हें
की जिंदगी से थोड़े नाराज हो गए है हम