અજાણ્યો પત્ર - 22
एक हाथ में जलती हुई सिगरेट, दूसरे हाथ में चलकती हुई शराब और होठों पर ठहेरा हुआ बस एक नाम,
किसी फिल्मी कहानी सी लगती हुई मेरी कहानी का बस यही तो अंत है, अब ना कोई कलम मुझे जिंदा रख सकती है, ना अब ये आंखे कोई ख़्वाब देखना चाहती है, जिंदा रहेना भी अब मुझे अपने आप पर बोझ सा लगता है.....,
इसलिए अब अंत जरूरी है, मेरे प्यार का अंत,
मेरे जीवन का अंत या फिर यूं कहे तो मेरा अंत।