🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
बचा अब शेष कुछ भी नहीं न वो आँखों
की नमी, न वो लबों की हँसी,
न वो रास्तों की धूल न वो यादों की गली
मुसाफिर थक गया है मंज़िलें राख हो
गईं, मेरे हिस्से की तो पूरी कायनात ही
सो गई,
वो जो एक धागा था उम्मीद का, टूट
चुका है वो जो एक चेहरा था रहबर का
छूट चुका है,
आईने अब अक्स दिखाने से कतराते हैं
दीवारों के साये भी अब मुझसे घबराते
हैं, धड़कनों में शोर है, मगर आवाज़
कहीं नहीं, मेरे ज़ख्मों का अब कोई
चश्मदीद गवाह ही नहीं,
धूप उतरी थी कभी आँगन में खुशियाँ
लेकर, अब तो सूरज भी गुज़रता है
दूरियाँ लेकर,
हाथ फैलाए खड़े हैं तन्हाई के शजर
ढूँढती है तुम्हें ही मेरी ये आवारा नज़र,
शाम ढलती है तो रूह काँप जाती है
तेरी मौजूदगी की खुशबू अब बस
तड़पाती है,
तुम गए तो वक्त ने जैसे साँस लेना छोड़
दिया, एक चलती हुई घड़ी को किसी ने
मोड़ दिया,
किताबों के पन्नों में दबी वो सूखी पंखुड़ी
कह रही है कि, मोहब्बत थी महज़ एक
मजबूरी,
अब न कोई शिकवा है न कोई फरियाद
है, बस एक वीराना है, जो तुम्हारी याद
है, हां बचा अब शेष कुछ भी नहीं...🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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