Hindi Quote in Poem by Anup Gajare

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“मैं……… हूँ”
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मैं एक गुफ़ा हूँ—
पथरीली, भीगी,
जहाँ विचारों की बूंदें
धीरे-धीरे गलाकर
मेरी ही दीवारों को चाटती रहती हैं।

मैं वह हूँ
जो दुनिया से नहीं डरता—
पर दुनिया को
अपने भीतर आने नहीं देता।

मेरी धमनियों में
ख़ून नहीं,
असहज सच्चाइयाँ बहती हैं—
सच्चाइयाँ, जिन्हें तुम सुनोगे
तो अपने कानों में
मोम भर लोगे।

मैंने जीवन को चुना नहीं,
जीवन ने मुझे
एक कोने में पटक दिया—
जैसे टूटे हुए खिलौनों को
बेकार समझकर
अंधेरे में फेंक दिया जाता है।

मेरी हँसी खुरदरी है—
कटती है…
किसी भी सभ्य चेहरे की त्वचा को।

मेरी दयालुता
बीज की तरह थी,
पर मिट्टी इतनी ठंडी पड़ी
कि वह उगने से पहले ही
कुंठा का पौधा बन गई।

मैं प्रेम कर सकता था—
पर प्रेम मेरे भीतर
टूटने का दूसरा नाम है।
मैंने लोगों को जितना पास बुलाया,
उतनी तेज़ी से
खुद अपनी खाल में वापस घुसा—
जैसे कोई घायल जानवर
अपने ही खून से डर जाता हो।

मैं अपनी ही छाया का विरोध हूँ,
अपनी ही आत्मा का दंश,
एक ऐसा कटु गीत
जो सुनने के बाद
लोग देर तक चुप रह जाते हैं।

मैं वह आदमी हूँ
जो अपने घाव खुद खोलता है—
क्योंकि उन्हें भरते देख
मुझे और ज़्यादा दर्द होता है।

मैं तर्क के विरुद्ध भी तर्क करता हूँ,
इच्छा के विरुद्ध भी इच्छा,
और अपने ही मन की
हर धड़कन पर शक करता हूँ—
क्योंकि संदेह ही
मेरी एकमात्र प्रार्थना है।

मेरे भीतर दो आदमी रहते हैं—
एक जो दुनिया को गाली देता है,
और दूसरा
जो खुद को।

और इन दोनों के बीच
मैं लटका हूँ—
एक ऐसे अंधेरे में,
जहाँ रोशनी का सिर्फ़
सवाल होता है—
जवाब नहीं।

मैं ज़िंदा हूँ
पर ख़ामोशी में दफ़्न,
मैं सोचता हूँ
पर सोच से घायल,
मैं मनुष्य हूँ
पर मनुष्य होने पर शर्मिंदा।

हां—
मैं……… हूँ।
मेरी डायरी
किसी के पढ़ने के लिए नहीं,
सिर्फ़ इतना बताने के लिए है
कि कभी-कभी
सबसे गहरी चीखें
कागज़ पर
धीमे-धीमे उतरती हैं।
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Hindi Poem by Anup Gajare : 112007746
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