लिखा तो था मगर सुनाया नहीं गया
राज-ए-दिल उनको बताया नहीं गया
छोड़ कर गया कोई बीच राह में
फिर लौट कर वापस आया नहीं गया
गीत लिखा था कभी जिनके लिए
आये वो सामने तो गुनगुनाया नहीं गया
पूछने आया था वो हाल-ए-दिल मेरा
ज़ख्म दिल का मगर दिखाया नहीं गया
थक हार कर हम वहीं बैठ गये 'बे-ख़बर'
हमसे बेवफाई का बोझ उठाया नहीं गया
_बेख़बर