"लफ़्ज़ और लोग"
कभी कहते हैं —
मेरे लफ़्ज़ सस्ते हैं,
कभी गूगल से, कभी कहीं और से आये हैं।
लफ़्ज़ सस्ते नहीं होते जनाब,
बस सुनने वाले की सोच सस्ती हो जाती है।
पर जो दिल से लिखता है,
वो जानता है…
हर मिसरा किसी एहसास का मलबा ढोता है।
एक शायर का दिल बहुत नर्म होता है,
वो तंज़ नहीं, समझ चाहता है।
आज का दौर अजीब है,
इंसान अब इंसान नहीं रहा,
बस एक मुक़ाबला बन गया है।
किसी की अच्छाई में भी खामियाँ ढूँढ लेता है,
ज़लील करने का मौका कोई छोड़ता नहीं।
और सच्चे लफ़्ज़…
अक्सर मज़ाक का निशाना बन जाते हैं।
कभी किसी के दिल में उतरकर देखो,
कितनी आवाज़ें हैं जो ख़ामोश रह जाती हैं।
हर मुस्कान के पीछे एक जंग चलती है,
जिसे दुनिया बस “अंदाज़” समझ लेती है।
शायर तो बस एहसासों का आईना होता है,
जो दूसरों का दर्द भी अपने लफ़्ज़ों में ढोता है।
मत तोलो लफ़्ज़ों को तंज़ के तराज़ू में,
कभी किसी दिल की सच्चाई पढ़कर देखो।
तुम्हारे ताने भी अब शेर लगते हैं,
और मैं कोई शायर नहीं हूँ,
बस दिल की बात लफ़्ज़ों में कह देती हूँ।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️