"आपने मेरे लिए किया ही क्या है?"
बच्चे जब पूछते हैं,
मां-बाप से अपने
"कि आपने मेरे लिए किया ही क्या है?"
वो क्या जाने,
उनको पाने के लिए
वो मंदिर, मस्जिद, हर दरगाह पर गए थे
हर पत्थर पर,
माथा टेक कर,
वो घंटों तक रोए थे
कितनी रातें उन्होंने
खुली आँखों के साथ गुज़ारी थी
बस, तुम्हारी एक किलकारी सुनने के लिए,
बिन पानी मछली की तरह
कितने तड़प-तड़प कर रोए थे
यूँ ही नहीं तुमने
इस दुनिया में क़दम रखा है
उनकी हर दुआ,
हर साँस ने तुम्हें जन्म दिया है
नादान बच्चे गुस्से में सवाल करते हैं
अपने ही मां-बाप से अपने जब,
तो उनका कलेजा फट सा जाता है,
जब वो बच्चे पूछते हैं —
"आपने मेरे लिए किया ही क्या है??"