🌺 नारी क्या है
नारी…
वो सृष्टि की प्रथम ध्वनि है,
वो जन्म की शुरुआत है,
जिसकी गोद में संसार ने साँस लेना सीखा।
वो कभी माँ बनकर ममता बरसाती है,
कभी बहन बनकर स्नेह लुटाती है,
कभी पत्नी बनकर अर्धांगिनी कहलाती है,
तो कभी बेटी बनकर घर का उजाला बन जाती है।
उसके आँचल में सुकून है,
उसकी आँखों में ब्रह्मांड का गहरापन।
वो मुस्कुराती है, तो लगता है जैसे सुबह खिल गई हो,
वो रोती है, तो लगता है जैसे बादल टूट पड़े हों।
नारी एक शक्ति है — जो सहती भी है, कहती भी है,
जो झुकती है तो प्रेम में, पर टूटती नहीं कभी अपमान में।
वो दीपक की लौ की तरह है —
छोटी सी होकर भी अंधकार को मिटा देती है।
वो केवल शरीर नहीं,
वो एक विचार है —
जो हर युग को नया अर्थ देती है।