मोहब्बत एक ख़याल है,
जिसे आज तक न कोई पढ़ पाया, वो किताब है,
तुम करते हो सवाल मुझसे,
क्या ये भी कोई सवाल है?
दिल के ज़ख़्मों में ही तो लिखी जाती है,
इश्क़ की असली तहरीर,
तुम नहीं समझते...
यही तो सबसे बड़ी बात है।
कभी चाहकर भी कोई समझ न पाया,
इश्क़ की वो चुप्पियाँ,
जिनमें रोते भी हैं,
और मुस्कुराते भी।