बहन का रिश्ता—बिन कहे भी गहरा 🌿
तू जो बात करना ही नहीं चाहती,
तो मेरी आँखों में ये इंतज़ार क्यों है?
हम दोनों ने मिलकर कितने राज़ बाँटे,
कितनी हँसी-ठिठोली में वक्त बिताया,
फिर ये खामोशी क्यों, ये दूरियाँ क्यों?
तेरी चुप्पी भी मेरे दिल तक पहुँचती है,
तेरी आँखों की नमी मुझसे छुपती नहीं।
बहन… दोस्ती से बढ़कर है ये रिश्ता,
शिकवे कितने भी हों,
मगर मोहब्बत हमेशा वहीं रहती है,
जहाँ तू और मैं साथ होते हैं।