जुल्फे तेरी ।।।।।।।
जुल्फें तेरी जुल्फें तेरी
जुल्फें तेरी जुल्फें तेरी
जिन की छांव में हम ने खाई थी
कसम जीने मरने की ।
जिन की छांव में हम ने खाई थी कसम जीने मरने की।
उन में हो गई जुएं क्या करे हम
अपना सिर घिसते घिसते
मम से हो गई मम्मा
हो गई हो भैस करती हो रंभा रंभा
छोरी से हो गई अब तुम छुरी
बन गई हो फैल कर तालाब
जिस मै पैदा होते है मच्छर
मच्छर भी हैं डेंगू वाले
जिनको मारने आते हैं MCD वाले
तुम करती हो रात दिन अब भिन्न भिन्न
ओडिमास लाऊंगा जिन्न जिन्न
देखूंगा अब डंक को तुम्हारे
छिड़कुंगा अब दवाई
तुम्हारे पंखों पर
अब तुम काटोगे किसको
ओ डंक वाली मम्मा
जुल्फे तेरी जुल्फें तेरी
चेहरा तेरा भांडाक भांडाक
रोती है रात दिन रुपैया रुपैया
भिनभिनाती है मेरे आजू बाजू
खून पीने के चक्कर में
कितना खून पीएगी मेरे बच्चों की मम्मी
कभी तो पीछा छोड़ ओ मच्छर की नानी
अब नहीं बचा है खून मेरे अंदर
लकड़ी सा हो गया हु सुख कर
अब तो रेहम कर
झगड़ती है रात और दिन
बेफालतू मै ओ झगड़ालू मम्मी
कभी तो चैन ले लिया कर ओ मम्मी ढअम्मी
कभी ये कभी वो, बस रोना ही रोना है
पाक गया हु तेरी बक बक से
अब सुधर जा ओ
मेरे बच्चों की मम्मी
लेखक
सुहेल अंसारी (सनम)
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