जब साथ तुम्हारा माँगा था
तब थे सबके अनुयायी
अब ढूँढोगे तो पाओगे
तुम सिर्फ मेरी परछाई। ।
तुम पर हर पल मरकर मैने
खुद को खोया यूँ जान गवाई
सबकी खुशी चाहिए तुमको
चाहे मैने अपनी जान गवाई। ।
नही पता फिर लरजिस पर
क्यों तेरे मोती सजते है
दिन-रात बरसती है आँखे
हर पल तुमको ढूंढा करती है।।
दूजे का गले का बन हार अभी
तुम मन ही मन इठलाते हो
मुझे जताते हो अक्सर की
तुम मन ही मन पछताते हो।।
मीरा सिंह