कैसे कहूं मैं तुम्हें, मेरे दिल का हाल क्या है,
तुम हो वो ख्वाब, जो हर सुबह मेरे साथ है।
तुम्हारे बिना मेरी दुनियां अधूरी है,
तुमसे ही मेरी हर ख़ुशी, हर कहानी ज़रूरी है।
तुम हो वो चाँदनी, जो अंधेरों में चमकती है,
तुम हो वो सुगंध, जो हर सांस में बसती है।
तुम हो मेरी पहली सोच, तुम हो मेरी आख़िरी दुआ,
तुम हो वो जवाब, जिसे हर सवाल ने तलाशा।
तुम्हारी हंसी में छुपी है मेरी पूरी दुनियां,
तुम्हारे आंचल में बसी है सुकून की बस्तियां।
तुम्हारी आँखों में है ख्वाबों का समंदर,
तुम्हारे लबों पे है ज़िंदगी का सुर्ख़ रंग।
कैसे कहूं कि तुम ही मेरी बंदगी हो,
तुमसे ही मेरी हर आराधना पूरी हो।
तुम हो वो इबादत, जो हर घड़ी दिल करता है,
तुम वो चाहत, जिसे पाने को हर अरमान तरसता है।
तुमसे जुड़ी है हर दिशा, पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण,
तुमसे ही सजी है मेरी हर सुबह, हर दिन।
तुम हो मेरी मंज़िल, तुम हो मेरा रास्ता,
तुमसे ही जुड़ा है मेरी ज़िंदगी का हर हिस्सा।
तुम्हारे बिना ये दिल सूना-सूना सा है,
जैसे बिना सुरों के साज़ अधूरा सा है।
तुमसे है मेरी धड़कन, तुमसे मेरी रूह ज़िंदा है,
तुम वो दवा हो, जो हर दर्द को शर्मिंदा है।
तुम्हारे बिना खोखला है हर हँसना, हर रोना,
तुमसे ही है हर जीत मेरी और हर खोना।
तुम वो सपना हो, जो आँखें खुली रहने पर भी देखा है,
तुम वो साया हो, जिसने हर मुश्किल में साथ दिया है।
कैसे बताऊं तुम्हें कि मेरे लिए तुम धर्म हो,
तुम ही मेरी आत्मा, तुम ही मेरा कर्म हो।
तुम्हीं वो देवी, जिसे दिल ने भगवान माना,
तुमसे ही मैंने सच्चे प्यार का मतलब जाना।
तो आज मैं अपने दिल का दरवाज़ा खोलता हूँ,
तुम्हें अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहता हूँ।
क्या तुम मेरी धड़कनों में हमेशा के लिए बसोगी?
क्या तुम मेरी आत्मा का हिस्सा बनोगी?
मैं तुम्हें खुद से भी ज़्यादा चाहता हूँ,
तुम्हारे बिना मेरा हर सपना अधूरा लगता है।
आज तुम्हें अपने जीवन का साथी बनाना चाहता हूँ।
मनोज संतोकी मानस