जब हम जवाँ थे
जब हम जवाँ थे
ज़मीं पर नहीं
आसमाँ पर थे
मस्ती भरी थी चाल
ख्वाबों में खुमार था
दुनिया रंगीन थी
इश्क बेशुमार था
जीने की तमन्ना
बहारों में थी
न कोई गम था
खुशियाँ गुलज़ारों में थी
न पढ़ाई की चिंता
न बुढ़ापे का खौफ था
बीत जाए जिंदगी यूँ ही
बस यही एक शौक था
सोचता हूँ अब
काश वो दिन आ जाएं
संभाल कर रखूँ जवानी
बुढ़ापे में काम आ जाए