यहाँ एक कविता है "मेरी स्पेस और आपकी इगो" पर:
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मेरी स्पेस और आपकी इगो
मेरी स्पेस, एक खुला आकाश,
जहाँ विचारों का होता है वास।
आपकी इगो, एक बंद दरवाज़ा,
जो रोकता है हर नया रास्ता।
मेरी स्पेस में उड़ते हैं सपने,
जहाँ हर दिन नए रंग बुनते।
आपकी इगो में बंधी हैं सीमाएँ,
जो हर खुशी को देती हैं ताने।
मेरी स्पेस में है स्वतंत्रता की हवा,
जहाँ हर पल है नया सवेरा।
आपकी इगो में है अहंकार की दीवार,
जो हर रिश्ते को करती है बेकार।
मेरी स्पेस में है सुकून का बसेरा,
जहाँ हर दिल है एक दूजे का सहारा।
आपकी इगो में है केवल अकेलापन,
जो हर खुशी को करता है बेगाना।
मेरी स्पेस में है प्रेम का संगीत,
जहाँ हर धड़कन है एक नई प्रीत।
आपकी इगो में है केवल शोर,
जो हर रिश्ते को करता है कमजोर।
मेरी स्पेस में है विश्वास की रोशनी,
जहाँ हर अंधेरा है एक नई कहानी।
आपकी इगो में है केवल संदेह,
जो हर रिश्ते को करता है निर्बल।
मेरी स्पेस में है अपनापन का एहसास,
जहाँ हर दिल है एक दूजे के पास।
आपकी इगो में है केवल दूरी,
जो हर रिश्ते को करती है अधूरी।
मेरी स्पेस में है सपनों का संसार,
जहाँ हर ख्वाब है एक नया आकार।
आपकी इगो में है केवल भ्रम,
जो हर रिश्ते को करता है कमज़ोर।
मेरी स्पेस में है सच्चाई की चमक,
जहाँ हर पल है एक नई झलक।
आपकी इगो में है केवल अंधकार,
जो हर रिश्ते को करता है बेकार।
मेरी स्पेस में है उम्मीद की किरण,
जहाँ हर दिल है एक दूजे का जीवन।
आपकी इगो में है केवल निराशा,
जो हर रिश्ते को करती है निराश।
मेरी स्पेस में है जीवन का सार,
जहाँ हर पल है एक नया विचार।
आपकी इगो में है केवल अहंकार,
जो हर रिश्ते को करता है बेकार।
मेरी स्पेस और आपकी इगो,
दोनों का है अलग-अलग रंग।
एक में है स्वतंत्रता का आकाश,
दूसरे में है अहंकार का बंद दरवाज़ा।
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