सारे प्रेम सही होते हैं शुरुआत में संदिग्ध होते हैं बीच में और अंत में ग़लत हो जाते हैं
अक्सर सारे सत्य ग़लत से मालूम पड़ते हैं शुरुआत में संदिग्ध दिखते हैं बीच में और अंत में सही हो जाते हैं
एक ही जगह होती है जहाँ प्रेम और सत्य संदिग्ध हो जाते हैं क्षण भर को लगा जैसे साया सा कोई पकड़ में आया था
साया-सा...
ईश्वर की पहचान है संदिग्ध अब भी
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