मैं और मेरे अह्सास
बूँदें बरसात की यादें ताजा कर गई l
यादें आँखों में अश्कों को भर गई ll
न भरनेवाले ज़ख्म देकर गया ज़ालिम l
एकाएक निगाहों की सुराही सर गई ll
ख्वाइशों के काफ़िले कितने अजीब है l
वादे के भरोसे दिल की नैया तर गई ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह