औरत की कहानी सर्वत की ज़ुबानी
हम औरत भी ना बहुत हीं ख़ामोशी से अपने काम कर जाते हैं,चाहे वो बचपन की बात हो, या बड़े हो जाने की बात, या फिर शादी के बाद या फिर माँ बनने क बाद...बचपन मे पापा के हाथों से मिठाई खाना, या कभी गुस्से मे पिराई खाना, दोनों के मज़े हीं अलग थे, माँ का गुस्सा करना फिर रात मे अपने हाथो से खाना खिलाना,पैरो मे तेल लगाना फिर सीने से लगा कर सुलाना, भाई का अपने साथ ना खेलना, फिर अपने दोस्तों के घर लेकर जाना, बहनो के साथ ज़म कर लड़ाई करना, फिर कान पकड़ कर सॉरी कहना फिर होमवर्क मे हेल्प मांगना, अम्मी अब्बू का बाहर कही जाना और हमारा ईद आ जाना, क्या खेला जाए, किचन मे क्या स्पेशल बनाया जाए, ये बचपन भी बहुत सुहाना था, जब किसी चीज की फ़िक्र नही थी,... भाई का सपोर्ट करना हर चीज मे... बचपन कब बड़े मे बदल गए, पता हीं नी चला??? शादी मे खुद से जायदा भाई, बहनो को रोता देख, फिर खुद को एहसास होना, प्यार तो बेसुमार हैं..... miss u all😢
शादी हो गयी, एक नया घर मिला, परिवार मिला, अम्मी कहती थी, इस घर को प्यार से रखना, संजो कर रखना, सब को लेकर चलना,, अम्मी आपकी बातें बहुत हीं खूबसूरती से निभा रही हुँ.... पर अम्मी मैंने सुना हैं अक्सर लोगो को कहते हुए,ससुराल को अपना समझा पर ससुराल के लोगो ने मुझे नही समझा,, थक कर एक दिन मैंने पूछ हीं लिए बात क्या है???? सामने से जवाब मिला, ""शादी से पहले थी में शहजादी अब लोगो ने मेरे अस्तित्व को ख़तम हीं कर दिया हैं,, पुरे घर की ज़िम्मेदारी हीं मुझपर पर एक छोटी सी खता हो जाए तो सुनने को मिल जाए क्या सिखाया माँ बाप ने तुझे, ताने सुन सुन कर थक गयी हुँ, अब चैन की नींद सो जाऊं,, एक औरत बस इतना हीं तो चाहती हैं के जब हो थक जाए तो सामने से लोग कहे बहुत थक गयी हो आराम करो, हम सब देख लेंगे, अब तो अपना हीं बर्थडे याद नो होता, खुद को भूल गयी हुँ, क्या थी क्या हो गयी... बस उम्मीद होती हैं के सामने वाला मुझे समझें, मेरी हर चीज याद रखे, मे रूठ जाऊं तो वो मनाये, हर दिन मैं स्पेशल हूँ वो मुझे बत्ताएं, ज़िन्दगी तुम्हारे बिन अधूरी हैं वो मुझे जाताये वो, सुबह Alarm से भी पहले उठ जाती हो, बच्चों को देखना, घर को संजोकर कर रखना,मेरे parents को अपना समझना, रात मे नींद कम लेना ताकि मैं अच्छे से सो जाऊँ बच्चों को सुलाते हुए अपना पूरा काम ख़त्म करना... कैसे कर लेती हो तुम ये सब?????""" thanku for everything🥰🥰🥰
"एक औरत सब वो काम कर लेती हैं बिना उफ़ किये, और हम मर्द ऐसे हैं जैसे ऑफिस से काम ख़तम होने क बाद मानो हमने कितना बड़ा काम किया हैं, हालांकि हम से कही जायदा तो काम हमारी wife कर लेती हैं """
एक औरत को और उसके काम को सम्मान दे 🙏
by
sarwat fatmi 🥰