हम राहों में बैठे हैं पलकें बिछाए,,
और आप पलक झपकते ही गायब हो गई।
अरे अच्छे से दीदार तो करने देते,,
आप तो दिल पर ऐसे चली जैसे तीखी तलवार हो गई
आओ बैठकर कुछ पल दिल की बात करें,,
इतनी बेरुखी भी तो दिल तोड़ती है।
कुछ तुम अपनी कहों,, कुछ हमारी सुनो,,
यह घड़ियां फुर्सत की भी तो नसीब से मिलती है।
कहने को तो हम सब अजनबी है,,
पर अब दिल ने दोस्ती स्वीकार किया,,
ऐ खुदा तेरा शुक्रिया जो तुमने,,
हम सब अजनबियों को एक किया।