आरिज ए बज़्म आरूज ए तामाम है,
नाम आरस्ता-डगर, आलम क्या है।
ख्वाब-ओ-ख्याल फिरदोस, यादों का,
म्सलन नींद बेहतर ये तालब क्या है।
आरिक-ए-नेहाद में मस्तियां दीवानगी,
दिल से जो पूछो ये पयगाम क्या है।
ज़ुबान-ए-अश्क में ग़ज़ल का नगमा,
रूठ ए आह साजो ए सामान क्या है।
फूलों से भी प्यारी बिन बादल बरसात,
जान भी दे दी गर, इनाम क्या है।
हर सूरत में तेरी तस्वीर का जादू,
दीवारों पर लिखा कलाम नाम क्या है।
रूसवाह-ए-खता, सुकून का मंज़र,
अजनबी शहर का बता नाम क्या है।
ख्वाब-ए-सब, बज्म या रूकन तेरी,
ग़ज़ल कह रही है इलजाम क्या है।
नग़्मों में बसर है महफिल-ए-अरज समा,
निगाह ए बला, क़िस्सा-ए-जाम क्या है।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद अपने आप मन के भाव को जोडे-समस्या को कसौटी पर परखे, केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705
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