🦋...सुनो ┤_★_
कुछ गहरा सा लिखना था" ज़ख्म से
ज्यादा क्या लिखूँ,
कुछ ठहरा सा लिखना था" दर्द से
ज्यादा क्या लिखूँ,
कुछ समन्दर सा लिखना था" आँसू
से ज्यादा क्या लिखूँ,
कुछ अपना सा लिखना था" आँखो
से ज्यादा क्या लिखूँ,
सुनो, अब सुकून लिखनी है" मौत
से ज्यादा क्या लिखूँ...🔥🥀
╭─❀🥺⊰╯
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♦❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙♦
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