ऐ हवा, तुम ये तो बताओ कि तुम हो के नहीं,
कभी लहरों सी, कभी सांसों में बस जाती हो।
कभी पत्तों की सरसराहट, कभी गीतों की तरह,
कभी छूकर गुजरती हो, कभी गले लगाती हो।
तुम्हारे होने का अहसास, हर वक्त होता है,
पर तुम दिखती नहीं, फिर भी सबको महसूस होती हो।
कभी ठंडी बयार बनकर सुकून लाती हो,
कभी तूफान बनकर सबको हिला जाती हो।
तुम्हारे बिना, जीवन अधूरा सा लगता है,
सांसों की धड़कन भी थमने लगती है।
तुम्हारी नज़रों से हम देख नहीं सकते,
पर तुम हो, ये दिल की गहराई कहती है।
ऐ हवा, तुम्हारा होना सवाल नहीं, यकीन है,
तुम्हारे बिना इस जीवन का अस्तित्व भी नहीं।
तुम्हारी मौजों में है जीवन की मिठास,
तुम हो, ये बात हर धड़कन कहती है।