#Pain
मैं और मेरे अह्सास
बेबसी दिल की किसीको बता नहीं सकते l
ज़ख्म ए जिगर किसीको दिखा नहीं सकते ll
चाहें कितने ही डोरे मन्नतों के धागे बांधे l
तकदीर में लिखा हुआ मिटा नहीं सकते ll
शाख से गिरते पतखड़ में मुरझाए हुए l
खिजां के फूल फ़िर से सजा नहीं सकते ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह