ग़ज़ल
मूझसे फ़क्त दिल छू लेने की सुखन कर ,
बुरा मतलबी सब झूठी दुनिया की बातें है ।
दूसरे भी खूबसूरत,साफ और सच्चे है,
खुद के मानिद देखे तो नज़र आते है।
नाफ़ह्म समझेगे कभी मीठे बोलने वालो को,
तल्ख़ सच नहीं मीठा सच बोलकर समझाते है ।
बशर तरगीबो - तमन्ना कभी नहीं होता,
ये तो मैयत के बाद सोहबत छोड़कर जाते है।
दिखावा जीस्त का परतौ है बरखुरदार,
दिखा दिखा कर सभी खुश हो जाते है।
पवन कुमार सैनी