અજાણ્યો પત્ર - 11
मेरे लिखने भर से ही अगर तुम मेरी हो जाती तो कितना अच्छा होता ना ! मैं लिखता रहता तुम्हे हर दिन हर रात सुबह हर शाम, लिखता तुमको राधा बनाकर कहता खुद को श्याम! सीता जैसी पवित्र लिखता, बनता तेरे लिए राम, चारो युगों में अमर रहेता तेरा मेरा हर नाम।