बहुत रहा बहाना मुफत़-ए यार हम पर भी,
मलहम दवा मसला यु ले बहार हम पर भी।
ज़ख्मों की तहंन जब भी है रंज यु उपकार,
दिल को मिलती है खुशबू, ज़हर हम पर भी।
जिन्दगी में इम्तेहान, सोहबत यु इतमिनान,
हरबार गुज़रता सफ़र, यु बजार हम पर भी।
दिल में छिपी है ये गमेसार ए कथाकार
पुरानी हो गयीं मगर, रंगी उदासी हम पर भी।
नगमा-ए गरूर या रब जो अबतलक समझा,
सुनो असराहत है सांगोपांग यु हम पर भी।
रख्ता वो भी समन्दरों की लहरें, दिलों ए बहार,
सब कुछ सितगार, के करार हम पर भी।
सोचो हमें कुछ तो, क्यों ना कोई जवाब दे,
राज़-ए उलफत में छिपी, मययार हम पर भी।
एक दिन हो गया अंजाम, रूसवा इक कहानी में,
गमे ए पल या ख़ुशी निसार, सवाल हम पर भी।
सरोकार ए रहम का जादू, दिल ए चाहत में,
बेअसर होता है हर ज़ख्म पर दवा हम पर भी।
ये ख़्वाबों की दुनिया, ये हकीकत की दुनिया,
सब कुछ होता है दिल की पुकार हम पर भी।
दुनिया की राहों में, एक दूसरे की तलब है ये,
साथ चलते हैं हम, हर गुज़रगाह हम पर भी।
हया, मोहब्बत, दोस्ती, सादगी,तबस्सुम ए यार में
कुछ होता है दूसरे का, मदद ए यार हम पर भी।
रंगों का जहां, ख्वाबों का सफर, खाकसार में
सब कुछ मोहब्बत का इंतजार हम पर भी।
ये शायरी की दुनिया, ये ख़्वाबों का सफ़र,
हर लम्हा होता है एक इज़हार हम पर भी।
सरफरोशी की ये दुनिया, इकसार की बहार,
गम ए गुस्सा कभी कभी सवार हम पर भी।
प्रमुख शब्द और उनके हिन्दी भावार्थ
मुफ़्त-ए यार: मुफ्त में मिली चीज़ (यहाँ दोस्ती)
तहंन: गहराई
रंज: दर्द
उपकार: कृपा, एहसान
इतमिनान: संतोष, शांति
गमेसार: गम की कहानी
कथाकार: कहानी कहने वाला
नगमा-ए गरूर: घमंड का गाना
असराहत: आराम
सांगोपांग: चारों तरफ
सितगार: सितारों का भरा हुआ
करार: शांति
मययार: स्तर
सरोकार: संबंध
ख़्वाबों: सपनों
हया: शर्म
तबस्सुम ए यार: दोस्त की मुस्कान
ख़ाकसार: विनम्र
इज़हार: व्यक्त करना
सरफरोशी: बलिदान
इकसार: समानता
बहार: वसंत, खुशहाली
गम ए गुस्सा: गुस्से का दर्द
© जुगल किशोर शर्मा बीकानेर
आयुर्वेद का पहला नियम भोजन दवा रूपी ही ग्रहण करे । Diabetes Awareness Plan I मल्टीग्रेन अनाज की रोटी I राबड़ी @multigrain_Meal @Healthy_food I //कृपया प्रतिदिन आहार में जौ,ज्वार,मक्का,बाजरा,चना, मूंग और मोठ का ही दलिया व आटे की रोटी, राब-राबड़ी डोहे की राब-राबड़ी का सेवन करे और निरोगी काया रखें ।