कच्छ की बारिश
कच्छ की धरा पर छाई जब घटाएं,
बादलों की गूंज से जागें सब दिशाएं।
धरती ने बिखेरे स्वर्णिम सपने,
बरसात की बूंदों में बंधे जीवन के रत्न।
सूखी रेत में बह निकलीं नदियां,
हरियाली की चादर ओढ़े बाग-बगियां।
मेघों की गूंज और बिजली की चमक,
कच्छ की रुत में भर दी नई दमक।
गांवों की गलियों में बच्चों का खेल,
फूलों की महक से महका हर एक बेल।
नवजीवन का संदेश लेकर आई,
कच्छ की बारिश ने धरती को सजाई।
आसमान से गिरते मोती जैसे बूंद,
हर दिल में जागे उम्मीदों की धुन।
कच्छ की बारिश, प्रकृति का वरदान,
हर दिल में भर देती नया अरमान।