#Drama
मैं और मेरे अह्सास
दिल में यादों की बरसात आई हुईं हैं l
साथ अपने हसीन लम्हें लाई हुईं हैं ll
बरसो मेघ औ जल बरसाओ चहुओर l
माटी ने पानी की बौछार पाई हुईं हैं ll
नाटक न कर गरजने बरसने का l
बड़ी आश में फ़सल लगाई हुईं हैं ll
छम छम छमाछम बादल गरजता है l
खेतों में सारस ने रागिनी गाई हुईं हैं ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह