तुम क्या ही समझोगे मेरी
तकलीफों को
तुम्हें तो मेरा इश्क भी समझ
नहीं आया
कहते हैं कि इन्तजार करना
और इन्तजार का पल इतना लंबा
पर तुम्हें क्या याद भी था मेरी
इन्तजार का फासला
तुम क्या ही समझोगे मेरी
इन्तजार को
तुम तो मेरा इश्क भी समझ नहीं आया
मेरी सांसें तो चलती है
कहते रहते हो कि
धड़कन इतना तेज क्यों
तुम क्या समझोगे कि
मेरी धड़कनें तेज क्यों
धड़कन का क्या वो
धड़कना छोड़ दें
तुम्हें तो मेरा इश्क भी समझ नहीं आया
और कहते हो कि
ये धड़कन क्यों बन्द है।
इश्क है। इश्क है।