साम तो ढल गई,
पर आज उसका कोई पैगाम ना आया.
दिल है बेचैन,
क्योंकि बेकरार इंतजार में घंटे बीत गए.
सोचा था वो शाम को आएगा,
पर वो ना आया.
अब रात भी गहरी हो चली है,
पर नींद आंखों में नहीं है.
उसका एक संदेश,
दिल को सुकून दे सकता है.
बस एक बार उसकी आवाज सुन लूं,
तो शायद ये बेचैनी कम हो जाए.
पता नहीं वो क्यों नहीं आया ?
क्या कोई बात बिगड़ गई है ?
मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे हैं,
पर कुछ समझ नहीं आ रहा है.
दुआ है कि वो जल्दी ही आ जाए,
और इस बेचैनी को दूर कर दे.
उसके बिना ये रातें,
बहुत लंबी और सिसकती हुई लग रही हैं.