तुम अगर देह और स्पर्श की
भाषा से आगे बढ़े ही नहीं
तो तुमने प्रेम समझा ही नहीं,
जहां मिलों की दूरियां हो
फिर भी मन मिल जाएं
जैसे मरुस्थल में हो पानी ऐसे
किसी से प्रीत मिल जाएं,
जहां विरह भी प्रतीक्षा बन
प्रेमी के लौट आने की आस से बंध जाएं
वो प्रेम तुमने कभी किया ही नहीं..!!♥️