सूरज चला अपने हमसफर से मिलने,
ढलती शाम का रंग लिए, सपनों के सिलसिले में।
रात की चादर ओढ़, सितारे उसकी राह सजाते,
चाँदनी की परछाईयाँ, उसकी बातें दोहराते।
सफ़र है लंबा, पर दिल में आस की किरण है,
मिलन की उम्मीद में हर दिन नई उमंग है।
रात के साए में, यादों की महक बसी है,
उस हमसफर की चाहत, हर कदम पर उसके संग है।