इश्क का आलम है ये, गलियों से भरा हुआ,
कहकशाओं समा हुआ, कलियों में बसा हैं।
तेरी सांसों में है, तेरी जुबा दरीचें को दैख,
तेरी उंगलियाँ दिलआं दरमियान बसा हैं।
जिस्म आग झूझता, उसके लफज को बेसमझ,
सितारों झुका देख, पर्वत भी हिस्बे हाल जंचा हैं।
वो सिहरन, जिसे देख कर फरिश्ते भी बेहोश,
शैतान भी रोये, उस आग में फफक बसा हैं।
ईश्के ए जंगल, आग वादे नहला भी दहल
क्या खुब है मोहब्बत सपने ही सबमें बसा है
जीजी जीजा साला कुनबा पुख्तानी जमाल
हजारी हाथ भी कम रहे, झुरमरानी हुरताल
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स्वुराज गाफिल जोबन मस्तकी बकताई धमाल
वक्त छापलुसी, उजियारा झुठी हरताई बकताल
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हमे हर हद में सीखातें है वो नूरे ए जमाल
पंतग भी कटी पंचर गारी फटी रही सलवाल
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मोहफत रूत रिग्यता, ईश्क चढया सुराज
कुनबा राग बेसुमार रीत रात दिन भुचाल
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#Smile