कभी-कभी में सोचता हूं कि
अंग्रेजों के वक्त अपने देश के वीर सपूत अपनी भरीं जवानी में
शहीद हुए हैं जैसे कि शहीद भगतसिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद,
और अभी भी देश के वीर जवान शहीद हो रहे हैं, तो फ़िर
अपने महात्मा गांधी जी बुढ़ापे में शहीद क्यूं हुए हैं ??????
इसका मतलब ऐ है कि शहीद होने से कूच नहीं मिलता हमें
राजनीति भी आनी चाहिए,दूध और दही में हाथ रखना भी
आना चाहिए अगर हमें मरने के बाद राजशाही भूगतना है तो
ऐ सबकूच करना ज़रूरी है शहीद होना ज़रूरी ही नहीं और वो
अभी भी राजशाही जीवन जी रहे हैं दस रुपए की नोट से
लेकर दो हज़ार की नोट तक और आगे भी जिएंगे और
जिसने देश के बलिदान दिया है वो रहे गए हैं एक रुपए से
सिक्के से लेकर दो रुपए के सिक्के तक और यहीं सही बात
है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️