#Alone
मैं और मेरे अह्सास
ज़िंन्दगी की पहेली कोई नहीं सुलझा पाया l
जीवने कभी खुशी कभी ग़म का राग गाया ll
कोई नहीं जान पाया कि ज़िंन्दगी क्या हैं l
जिंदा दिली से जियो तो खूबसूरत छाया ll
क़रीब जाकर देखा तो लगती है अज़ीब l
बला है क़हर है या फिर है कोई माया ll
अकेला ही चलता था सफ़र में यूंही l
सहने की शक्ति रखो हैं गम का साया ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह