અજાણ્યો પત્ર - 08
इस युग का प्रेम बड़ा ही विचित्र है! किसी ओर के छूने भर से ही प्रेम समाप्त हो जाता है! और हमारा प्रेम देखो! तुम किसी ओर की बाहों में लिपटती रही, चूमती रही उसके होठों को, तरबतर करती रही तुम खुद को, खेलती रही तुम मेरे जज्बातों को, लेकिन फिर भी मेरा प्रेम तुम्हारे लिए जीवंत है। अमर है।