जो चाहा कभी नियति में आया ही नहीं और जो कभी सोचा नहीं, वो जीवन का अभिन्न हिस्सा है। मन इतना बेपरवाह है कि सब कुछ होते हुए भी, जो नहीं है उसकी गम में डूबा रहता है। किसी का जीते जी छोड़ जाना, मुझसे बर्दास्त नहीं होता। ख़ैर, जीवन है, अनुभव है फिर मृत्यु है। हँसना है जी भर के।