जीवन
क्या है जीवन? है वन
यदि हो यत्न मिले रत्न
या है केवल व्यर्थ प्रयत्न
क्या है मात्र जीने का जतन
रिश्तों का उलझा ताना बाना या
रेशम डोरी का कोमल वसन?
परे है समझ से ये शायद
या स्पष्ट होता रहता नित जीवन
कभी लगे सब अपने है
क्षण अगले लगे केवल ये अपना मन
इसी उधेड़ बुन में निकल रहा
किसका ? क्या है? ये जीवन
घटित हो रही घटनाओं का
है केवल एक पुलिंदा जीवन
या इन्हीं उलझनों को सुलझाने
की कोशिश में लगा यह अंतर्मन
यही है संभवतः जीवन