मैं एक परिंदा
आझ़ाद परिंदों सा मैं
तलाशता हूँ खुदको आजकल
इस नए जमाने के दौर में
आजमाता हूँ कुछ बहतरीन तरिके अब
नई मंजिले, नई ख्वाहिशों में
उलझा रहता हूँ अब
जिंदगी को कभी नए सिले से ढालता
तो कभी नए सलीके से जीने की कोशिश
हूँ अब..
इस नए सफ़र में खुदको ही
सोचता हूँ मैं अब,
नये सपनों को पाने की मैं
उड़ान भरता हूँ अब!
- आकांक्षा