चाहा था कब की शक्ष हमारे रूह को छु जाए,
बस इतना छु जाए आँखो मे रुक कर ख़्वाब हो जाए,
हमारी कोनसी खूबी हैं हमसे हमारी खुशिया छीन जाए,
आप तो जहाँ मे बैठो, हाथ लगाओ तो सारा जहाँ जगमगा जाए,
तुम ऐसा कोनसा वहम ले कर जी रहे हो की हमे आपके सिवा संभाल ना पाए,
ये करिश्मा अगर मन से खत्म हो तो आवो दुबारा इश्क़ का खेल खेला जाए,
ये महोब्बत भी ना बहुत दर्द ए किरायेदार का मासूम से दिल पर लिखती हैं,
जिंदगी मे बरबाद होने कर्ज मे दुबे तो दुकानदार भी जीते जी रास्ते पे आ जाए।
DEAR ZINDAGI 🙏