धागे मन्न्तो के चल बांध आते हैं,
मिले या बिछड़े खुदा पर छोड़ आते हैं,,
वस्ल का दिन ,और हम इत्मीनान से हो,
सवालात जितने हो खुदा पर छोड़ आते है,
धागे मन्नतो के चल बांध आते हैं.......
ईद का दिन और तू मुझे दिखे," बस,"
ये आखरी ख्वाहिश खुदा पर छोड़ आते हैं,,धागे मन्नतो के चल बांध आते हैं......
इंतजार में बीते ये दिन कैसी उलझन है,
वक्त की एक डोर खुदा के पास छोड़ आते है,, धागे मन्नतो के चल बांध आते हैं,......
अन्जू