मन मनुआ तेरी झोपरी, गल कटयन रे पास
सुबह शाम तरकारी, सब्जी इब्तदार दे खास
तराजू ही बिकर गई, धोखा बस वाहरी जबरा बोराया न्याव
लुटझूठ और बंदरबाट दवा दारू चहुऔर कौन इसे समझाव
सिंग संजय तन्दरूस्त, रूठ हलकमाय जुबानजमा
बाद करे सियासत, गबरू घबरा लूटमार लुकमाना